"आरक्षण लाना है तो गरीबों के लिए लाओ।
गरीबी दूर करके उनका भविष्य चमकाओ।"
प्रस्तावना-भारत के संविधान में देश के समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक राजनैतिक अधिकार समान रूप से प्राप्त हैं। देश के शुभचिन्तकों एवं कर्णधारों में यह बात सपने में भी नहीं सोची थी कि जिस आरक्षण नीति की व्यवस्था वे लोगों के हित के लिए कर रहे हैं वह एक दिन वेर, कटुता तथा भेद-भाव का रूप धारण कर लेगी। लेकिन समय बलवान है। इसकी गति को रोकने में कोई भी सक्षम नहीं है। देश के स्वतन्त्र होने पर देश के कर्णधारों ने देश से छुआछूत, गरीबी और असमानता मिटाने के लिए दलित वर्ग के लिए आरक्षण की नीति निर्धारित की। इस आरक्षण नीति को दस वर्ष के लिए लागू किया गया था। किन्तु समय के साथ यह अवधि सुरसा के मुख की तरह बढ़ती ही चली गई और अभी तक इसका अन्त नहीं आ पाया है। अत: इस समय समस्त समस्याओं की जड़ यह आरक्षण नीति ही है।
आरक्षण नीति की समस्या-यद्यपि आरक्षण नीति का शुभारम्भ जन हिताय की भावना से किया गया था लेकिन इसके परिणाम हमारे नेत्रों के समक्ष ठजागर हैं। अनेक सवर्ण नौजवान नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। बहुमुखी प्रतिभायें देश को त्याग कर विदेशों में नौकरी करने के लिए विवश हैं। देश में तो नौकरियों का आरक्षण है। अत: सवर्ण नौजवानों के लिए तो यहाँ नौकरी पाने की आशा ही नहीं करनी चाहिए।
आरक्षण नौति की आवश्यकता अब प्रश्न यह उठता है कि यह नीति देश में लागू करनी चाहिए अथवा नहीं ? इसका एक मात्र ठत्तर यही है कि आवश्यकता तथा देशहित में विचार करके इसे संशोधित रूप में क्रियान्वित किया जाए। तभी इससे देश को लाभ हो सकता है अन्यथा तो यह देश के युवावर्ग में निराशा को उत्पन्न करने वाली है।
समस्या का निराकरण आरक्षण नीति बेरोजगार पढ़े-लिखे नौजवानों से जुड़ी है। इससे इस नीति के फलस्वरूप शिक्षित युवकों को रोजगार-परक शिक्षा प्रदान करके नौकरी के अवसर प्रदान किए जायेंगे। योग्य तथा होनहार युवकों को भी नौकरी देकर समस्या का निराकरण सम्भव है। पदोन्नति में आरक्षण सुविधा न्यायसंगत नहीं है। देश में नौकरी का अवसर हर योग्य और प्रतिभासम्पन्न नौजवान को प्राप्त होना चाहिए । आरक्षण जातिगत न होकर आर्थक आधार पर किया जाना चाहिए ताकि निर्धनों को भी आगे आने का अवसर प्राप्त हो सके।
उपसंहार-देश के हित में यहा उपयुक्त है कि आरक्षण व्यवस्था जाति के आधार पर न होकर आर्थिक स्थिति को दृष्टिपथ में रखकर की जानी चाहिए। सरकार का यह उत्तरदायित्व है।कि वह आरक्षण नीति को सर्व जनहिताय भावना से लागू करे तभी देश के नौनिहाल गर्व से सीना तान कर स्वस्थ तथा आनन्दमय जीवन बिताने में सक्षम होंगे।
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